
आमागोहन पंचायत सीसी रोड पर घमासान: इंजीनियर ओंकर कैवट का गोल-गोल जवाब निजी आंगन में ढलाई के आरोपों पर जांच की मांग तेज
ग्रामीणों का आरोप—जहां सड़क बननी थी वहां नहीं बनी, निजी घर के आंगन में कर दी गई ढलाई; इंजीनियर बोले—“मैं स्थल पर गया था”, लेकिन एस्टीमेट और लंबाई-चौड़ाई पर स्पष्ट जवाब नहीं

जीशान अंसारी की कलम से,खोंगसरा/आमागोहन/बिलासपुर।
ग्राम पंचायत आमागोहन में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए करीब 100 मीटर सीसी रोड निर्माण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में अनियमितता, गुणवत्ता और पंचायत की राशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की तकनीकी एवं भौतिक जांच की मांग की है। मामला अब संबंधित इंजीनियर ओंकर कैवट की भूमिका और स्थल निरीक्षण को लेकर भी सवालों के घेरे में है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर सीसी रोड का निर्माण होना था, वहां निर्धारित सड़क के बजाय पंचायत की राशि से एक निजी घर के सामने आंगन की ढलाई कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान संबंधित इंजीनियर द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया था या नहीं, यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
मीडिया के सवाल पर इंजीनियर ओंकर कैवट के जवाब पर उठे सवाल

मीडिया टीम द्वारा जब इंजीनियर ओंकर कैवट से पूछा गया कि ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान उन्होंने स्थल निरीक्षण नहीं किया था, तो इंजीनियर ने जवाब दिया कि वे मौके पर गए थे।
लेकिन जब उनसे निर्माण कार्य के एस्टीमेट, सड़क की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई सहित तकनीकी विवरण के संबंध में सवाल किए गए, तो उनके जवाब स्पष्ट नहीं बताए गए और वे इन सवालों पर गोल-मोल जवाब देते नजर आए।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि इंजीनियर स्वयं स्थल पर निरीक्षण के लिए गए थे, तो उन्हें स्वीकृत सीसी रोड की लंबाई, चौड़ाई, मोटाई और एस्टीमेट की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए थी। यही बिंदु अब ग्रामीणों की शिकायत में जांच का प्रमुख आधार बन गया है।
इंजीनियर बोले—“ऐसा कोई काम नहीं हुआ, जहां काम था वहीं सीसी रोड बनी”
मीडिया से बातचीत के दौरान इंजीनियर ओंकर कैवट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई अलग काम नहीं हुआ है और जहां कार्य स्वीकृत था, वहीं सीसी रोड का निर्माण हुआ है।
वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अपने आरोपों पर कायम हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौके की वास्तविक स्थिति, स्वीकृत नक्शा/एस्टीमेट और माप पुस्तिका का मिलान किया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
यही कारण है कि अब केवल अधिकारियों या पंचायत के रिकॉर्ड पर भरोसा करने के बजाय ग्रामीण मौके पर भौतिक सत्यापन और तकनीकी जांच की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का सीधा सवाल—सड़क कहां बनी और आंगन की ढलाई किस मद से हुई?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सीसी रोड के लिए 15वें वित्त की राशि स्वीकृत हुई थी, तो जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि:
स्वीकृत सीसी रोड की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई और मोटाई कितनी थी?
मौके पर वास्तव में कितनी लंबाई की सड़क बनी?
क्या सड़क के अलावा किसी निजी परिसर में ढलाई की गई?
यदि निजी स्थान पर ढलाई हुई तो वह किस स्वीकृत कार्य का हिस्सा थी?
माप पुस्तिका में किस स्थान और कितनी मात्रा का उल्लेख है?
इंजीनियर ने स्थल निरीक्षण कब-कब किया?
निरीक्षण के दौरान क्या रिपोर्ट तैयार की गई?
निर्माण की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई?
भुगतान किस बिल और माप के आधार पर किया गया?
तस्वीर और ग्रामीणों के बयान बनाम इंजीनियर का दावा
मामले में अब एक तरफ इंजीनियर ओंकर कैवट का कहना है कि स्वीकृत स्थान पर ही सीसी रोड का निर्माण हुआ है, जबकि दूसरी तरफ ग्रामीण निर्माण स्थल को लेकर अलग दावा कर रहे हैं।
ऐसे में किसी पक्ष के आरोप या जवाब के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय स्वीकृत एस्टीमेट, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, कार्यादेश, बिल-वाउचर और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान करना जरूरी है।
यदि जांच के दौरान यह प्रमाणित होता है कि स्वीकृत कार्य से अलग किसी निजी स्थान पर पंचायत की राशि से निर्माण कराया गया, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने और नियमानुसार कार्रवाई का प्रश्न उठेगा। वहीं यदि ग्रामीणों के आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो जांच रिपोर्ट से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
ओंकर कैवट की भूमिका पर उठे सवाल, जांच में सामने आना चाहिए सच
पूरे मामले में इंजीनियर ओंकर कैवट की भूमिका इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनके द्वारा स्थल निरीक्षण किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होना चाहिए कि निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर क्या देखा, माप क्या दर्ज किया और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर क्या रिपोर्ट दी।
ग्रामीणों की मांग है कि जांच किसी एक पक्ष के बयान तक सीमित न रहे, बल्कि स्वतंत्र तकनीकी टीम द्वारा मौके का माप लेकर सीसी रोड की लंबाई, चौड़ाई और मोटाई की जांच की जाए तथा माप पुस्तिका से उसका मिलान किया जाए।
अब जिला पंचायत और जनपद पंचायत की जांच पर टिकी नजर
आमागोहन पंचायत में 15वें वित्त की सीसी रोड का यह मामला अब केवल सड़क निर्माण का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि पंचायत राशि के उपयोग, तकनीकी निरीक्षण और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच केवल पंचायत कार्यालय के दस्तावेजों तक सीमित रखते हैं या फिर मौके पर पहुंचकर वास्तविक माप और निर्माण की स्थिति का भौतिक सत्यापन कराते हैं।













